लोहरीपुर के राजा

मैं यहाँ सिर्फ एक द्वार भर नहीं हूँ, बल्कि इस द्वार की मूल धातु लोहे की कथा को भी अपने में समेटे हुये हूँ। पत्थर से लोहे तक की मेरी यात्रा आसान नहीं थी। अनेक बार मैं अपने इस रूप को प्राप्त करते-करते नष्ट हुआ हूँ। पर मुझे यह रूप देने वाले लोग कभी थके नहीं और वे बार-बार हमें गढ़ने का प्रयत्न करते रहे। तब कहीं जाकर मुझे यह सम्मान प्राप्त हुआ है।

The king of Loharipur

The king of Loharipur

I am not just a doorway here, rather I contain the story of Iron within me. My journey from stone to iron was not easy. Many times I perished while getting to this present form, but the people who brought me to this form never got tired and consistently kept trying to give the shape that I have today. And that is how I gained this respect.