टटल देवी

बहुत पहले ठीक औजारों के न होने, जीवन में तमाम तरह की दुर्गमता होने या लापरवाही से जब शरीर की हड्डियाँ टूट जाती थीं, तो उन्हें जोड़ने और फिर पहले जैसा बल प्रदान करने का काम मैं करती हूँ। कहीं-कहीं मुझे खोड़ियाल माता भी कहा जाता है। सिर्फ मानवों के ही नहीं, मैं तो मवेशियों के टूटे पैर भी जोड़ देती हूँ। रेसकुल पेड़ के नीचे मेरा स्थान होता है, जहाँ ठीक होने के लिये मानता लेकर लोग लकड़ी के हाथ-पैर चढ़ा जाते हैं।

Tatal Devi

Tatal Devi

Long ago in the absence of proper tools when due to an accident or carelessness when the bones or limbs of one's body would get broken, I would do the work of joining those limbs and then restoring their strength. I joined the broken limbs not just of the humans, but of their cattle's too. At some places I am known as Khodiyal Mata and I live under the Reskul tree, where people offer wooden limbs after they recover from their pains.